➤ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में टोयोटा किर्लोस्कर के साथ समझौता
महाराष्ट्र भूमि | मुंबई:
महाराष्ट्र में लाखों महिला यात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य भर के एसटी बस स्टेशनों पर स्तनपान कराने वाली माताओं की सुविधा के लिए 125 अत्याधुनिक ‘हिरकणी कक्ष’ (मातृत्व देखभाल कक्ष) स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए एसटी महामंडल ने टोयोटा किर्लोस्कर मोटर प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह करार राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रमुख उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार तथा परिवहन मंत्री एवं एसटी महामंडल के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक विशेष रूप से उपस्थित थे।
➤ टोयोटा किर्लोस्कर के CSR फंड से होगा निर्माण:
इस परियोजना के लिए टोयोटा किर्लोस्कर मोटर अपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी पहल के तहत पूरा वित्तीय सहयोग प्रदान करेगी। समझौते के अनुसार, एसटी बस अड्डों पर लगभग 3 मीटर × 3 मीटर आकार के प्री-फैब्रिकेटेड ‘हिरकणी कक्ष’ बनाए जाएंगे। इन कक्षों में माताओं को स्तनपान कराने और शिशुओं की देखभाल के लिए आवश्यक गोपनीयता और सुरक्षा मिलेगी। इसके साथ ही इसमें आवश्यक फर्नीचर, फिक्सचर, वायरिंग, लाइटिंग और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी शामिल होंगे।
➤ 3 वित्तीय वर्षों में 125 कक्षों का लक्ष्य:
2026-27: 50 हिरकणी कक्ष
2027-28: 50 हिरकणी कक्ष
2028-29: 25 हिरकणी कक्ष
➤ एसटी महामंडल की जिम्मेदारी और शून्य वित्तीय भार:
इस परियोजना के लिए एसटी महामंडल लगभग 5 मीटर × 5 मीटर जगह, बिजली, पानी का कनेक्शन और आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृतियां प्रदान करेगा। निर्माण कार्य पूरा होने और हस्तांतरण के बाद इन कक्षों का संचालन, सुरक्षा, रखरखाव और मरम्मत की पूरी जिम्मेदारी एसटी प्रशासन की होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरी योजना के लिए एसटी महामंडल पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा; इसका पूरा खर्च टोयोटा किर्लोस्कर का सीएसआर फंड उठाएगा।
➤ मातृत्व का सम्मान और महिला सुरक्षा की दिशा में संवेदनशील पहल:
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि एसटी केवल एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की जीवन रेखा है। ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक प्रतिदिन लाखों महिलाएं एसटी से यात्रा करती हैं। बस स्टेशनों पर स्तनदा माताओं के लिए एक अलग, स्वच्छ और सुरक्षित स्थान मिलने से महिला यात्रियों के सफर का अनुभव बेहतर होगा और यह कदम मातृत्व के प्रति सम्मान प्रकट करता है।

