अर्चना त्रिपाठी
राज्य सरकार द्वारा ‘नशामुक्त महाराष्ट्र 2029’ अभियान के लिए एक सर्वसमावेशक नीति को दी गई मंजूरी ने प्रदेश में एक नई उम्मीद और गंभीर विमर्श को जन्म दिया है। जब किसी राज्य में अवैध नशीले पदार्थों के उत्पादन, परिवहन, बिक्री और सेवन पर समूल रोक लगाने के लिए ग्राम स्तर से लेकर मंत्रालय स्तर तक की जवाबदेही तय की जा रही हो, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या 2029 तक नशामुक्त महाराष्ट्र का सपना वाकई साकार हो सकता है? इसका सीधा उत्तर है—हाँ, यह लक्ष्य पूरी तरह मुमकिन है, बशर्ते इसे केवल प्रशासनिक आदेशों तक सीमित न रखकर एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप दिया जाए।
इस लक्ष्य की साध्यता का सबसे बड़ा आधार सरकार का ‘सर्वसमावेशक दृष्टिकोण’ और चार-स्तरीय रणनीतिक ढांचा है। प्रभावी कार्यान्वयन, सप्लाई नेटवर्क पर कड़ा प्रहार, मांग में कमी और पुनर्वास जैसे चार मजबूत स्तंभों पर टिकी यह नीति केवल पुलिसिया कार्रवाई तक सीमित नहीं है। प्राथमिक स्तर से ही स्कूली पाठ्यक्रम में नशामुक्त जनजागृति का अध्याय शामिल करना और उच्च शिक्षण संस्थानों को ‘ड्रग-फ्री कैंपस’ बनाना एक दूरदर्शी कदम है। जब नई पीढ़ी को शुरुआत से ही इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाएगा, तो नशे की मांग अपने आप घटने लगेगी। इसके साथ ही, बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को पुरस्कृत करने और पंचायतों को जवाबदेह बनाने का प्रावधान इस अभियान में जन-भागीदारी को सुनिश्चित करता है।
हालाँकि, इस मार्ग में चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। आज पारंपरिक नशीले पदार्थों का स्थान सिंथेटिक ड्रग्स ने ले लिया है, जिन्हें गुप्त रूप से बनाना और बेचना आसान होता है। इन पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और इंटेलिजेंस का आधुनिक तकनीक से लैस होना अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा, राज्य की लंबी समुद्री सीमा और अन्य राज्यों से जुड़े परिवहन मार्गों पर कड़े नियंत्रण के लिए अंतर-राज्यीय समन्वय की जरूरत होगी। केवल अपराधियों को सजा देना काफी नहीं है; जब तक पीड़ित युवाओं को उचित इलाज, मानसिक परामर्श और रोजगार के अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक वे इस दलदल से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाएंगे।
इस परिवर्तनकारी यात्रा में हमारी नई पीढ़ी यानी Gen Z और सामाजिक संस्थाएँ सबसे निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। आज के युवा फिटनेस कल्चर, डिजिटल अवेयरनेस और सोशल मीडिया अभियानों के जरिए अपने साथियों को सही राह दिखाने में सक्षम हैं। जब समाज नशे को फैशन मानने के बजाय एक स्वस्थ जीवनशैली को प्राथमिकता देगा, तो इस सामाजिक बुराई की जड़ें स्वयं कमजोर हो जाएंगी। ‘नशामुक्त महाराष्ट्र 2029’ केवल एक कागजी लक्ष्य नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य का आधार है। कानून की सख्ती, शिक्षा में संस्कार, प्रशासनिक पारदर्शिता और जन-आंदोलन का यह संगम 2029 तक नशामुक्त महाराष्ट्र के सपने को निश्चित ही हकीकत में बदल सकता है या नहीं यह तो समय की बताएगा। “नशामुक्त महाराष्ट्र” को लेकर आपकी क्या राय है, हमें जरूर बताये। आपके सुझाव हम अपने में जरूर शामिल करेंगे।
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