- वृक्षारोपण अभियान में अत्याधुनिक तकनीक, ड्रोन और सैटेलाइट का होगा उपयोग: वन मंत्री गणेश नाईक
महाराष्ट्र भूमि | अर्चना त्रिपाठी (मुंबई)
महाराष्ट्र में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण का संकल्प लिया है। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में और वन मंत्री गणेश नाईक की प्रमुख उपस्थिति में विधान भवन में ‘हरित महाराष्ट्र प्राधिकरण’ की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निर्देश दिए कि राज्य में वृक्षारोपण अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक, सार्वजनिक-निजी भागीदारी , ग्राम पंचायतों के सूक्ष्म नियोजन और विभिन्न सरकारी विभागों के आपसी समन्वय से इस साल राज्य में 18 करोड़ वृक्षारोपण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य पूरा किया जाए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में ‘हरित महाराष्ट्र आयोग’ की वृक्षारोपण अभियान को लेकर आयोजित इस समीक्षा बैठक में राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक, ‘मित्रा’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं मुख्यमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार प्रवीण परदेशी, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव मिलिंद म्हैसकर, कृषि सचिव परिमल सिंह, कृषि आयुक्त सूरज मांडरे समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। वही राज्य के सभी जिला अधिकारी और वन अधिकारी इस बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे।
➤ तकनीक से होगी रियल-टाइम मॉनिटरिंग (ड्रोन और सैटेलाइट का उपयोग)
बैठक में जानकारी दी गई कि इस बार वृक्षारोपण के केवल लक्ष्य तय नहीं किए जा रहे हैं, बल्कि उनके जीवित रहने और विकास की रियल-टाइम मॉनिटरिंग भी की जाएगी। इसके लिए सैटेलाइट तकनीक, ड्रोन और जीआईएस प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। ‘महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर’ के माध्यम से एक विशेष प्रणाली विकसित की गई है, जिससे लगाए गए पौधों की स्थिति की आगामी छह महीनों तक सटीक जांच की जा सकेगी। इसके साथ ही, रोपण योग्य भूमि की पहचान करने के लिए जीआईएस आधारित ‘लैंड बैंक’ तैयार कर जिलाधिकारियों को सौंप दी गई है।
➤ हर ग्राम पंचायत बनाएगी अपना ‘वृक्षारोपण ब्लूप्रिंट’
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘व्ही बी-जी राम जी योजना’ के अंतर्गत वृक्षारोपण को गति दी जाए। प्रत्येक ग्राम पंचायत अपनी उपलब्ध भूमि का नियोजन करे और ग्राम सभा के प्रस्ताव के माध्यम से वृक्षारोपण का एक ‘आराखड़ा’ तैयार कर उसे केंद्र सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड करे। यदि यह कार्य समय सीमा में पूरा होता है, तो इस अभियान के खर्च का एक हिस्सा केंद्र सरकार से निधि के रूप में प्राप्त हो सकेगा।
➤ पौधों की उपलब्धता और पीपीपी (PPP) मॉडल
अभियान को सफल बनाने के लिए पौधों (सैपलिंग्स) की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई:
➤ वन विभाग: वर्तमान में वन विभाग के पास लगभग 6 करोड़ पौधे उपलब्ध हैं, जिसे अगले वर्ष तक 10 करोड़ करने का लक्ष्य है। इसके लिए निजी नर्सरी को पीपीपी मॉडल पर जोड़ा जाएगा।
➤ कृषि विभाग व विश्वविद्यालय: कृषि विश्वविद्यालयों की नर्सरी से लगभग 15 लाख और निजी मान्यता प्राप्त नर्सरियों के माध्यम से 2 करोड़ 66 लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विभागीय आयुक्त अपने-अपने संभागों में जिलावार समीक्षा कर नियमित रूप से सरकार को रिपोर्ट सौंपें। उन्होंने महानगरपालिकाओं को भी इस अभियान के लिए विकसित एकीकृत कार्यप्रणाली को लागू करने के निर्देश दिए हैं।

