अंतरराष्ट्रीय डेस्क, नई दिल्ली:
वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) से आम जनता और अर्थव्यवस्था के लिए एक राहत भरी खबर आ रही है। तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक प्लस (OPEC+) ने कच्चे तेल (Crude Oil) के उत्पादन में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। संगठन की एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक के बाद यह घोषणा की गई कि आगामी अगस्त महीने से प्रतिदिन 1 लाख 88 हजार (188,000) बैरल अतिरिक्त तेल का उत्पादन किया जाएगा।
ओपेक प्लस के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करना और बाजार में स्थिरता (Market Stability) बनाए रखना है।
इन 7 प्रमुख देशों ने लिया तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला
आज हुई इस वर्चुअल बैठक में वैश्विक तेल बाजार की मौजूदा स्थितियों की गहन समीक्षा की गई। इसके बाद ओपेक प्लस के 7 प्रमुख सदस्य देशों ने साझा बयान जारी कर इस फैसले की जानकारी दी। इन देशों में शामिल हैं:
- सऊदी अरब (Saudi Arabia)
- रूस (Russia)
- इराक (Iraq)
- कुवैत (Kuwait)
- कजाकिस्तान (Kazakhstan)
- अल्जीरिया (Algeria)
- ओमान (Oman)
बाजार की स्थिति के अनुसार बदलेगी रणनीति
ओपेक प्लस देशों ने साफ किया है कि वे बाजार को लेकर एक सतर्क और लचीला रुख अपना रहे हैं। संगठन के पास बाजार की तात्कालिक स्थितियों को देखते हुए उत्पादन को और बढ़ाने, कुछ समय के लिए रोकने या इस फैसले को पलटने का विकल्प हमेशा खुला रहेगा।
बयान में कहा गया है कि संगठन वैश्विक तेल बाजार पर लगातार नजर बनाए रखेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि सभी सदस्य देश तय किए गए प्रोडक्शन टारगेट का पूरी तरह पालन करें।
भारत और आम जनता पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात (Import) करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति (Supply) बढ़ने से कीमतों में स्थिरता आएगी। यदि वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल के दाम कम होते हैं, तो भारतीय तेल कंपनियों पर दबाव कम होगा, जिससे आने वाले समय में घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
अगली बैठक कब?
ओपेक प्लस की इस उत्पादन नीति और बाजार की स्थितियों की समीक्षा के लिए सदस्य देशों की अगली बैठक 2 अगस्त को निर्धारित की गई है।

