➤ एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे को सौंपा ज्ञापन; खाद्य विक्रेताओं के लिए ‘सिंगल विंडो’ लाइसेंस प्रणाली शुरू करने की भी अपील
महाराष्ट्र भूमि | मुंबई:
नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाली टैटू की स्याही और अगरबत्ती में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक रसायनों पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन का कड़ा नियंत्रण होना चाहिए, ऐसी मांग मुंबई की पूर्व महापौर डॉ. शुभा राऊल ने की है। इस संबंध में उन्होंने एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। इसके अलावा, अधिकृत खाद्य विक्रेताओं को विभिन्न अनुमतियों के झंझट से मुक्ति दिलाने के लिए ‘एक खिड़की’ लाइसेंस प्रणाली शुरू करने की मांग भी की है।
पर्यटन स्थलों, मेलों और हिल स्टेशनों पर इन दिनों टैटू बनवाने का चलन तेजी से बढ़ा है। हालांकि, इसके लिए इस्तेमाल की जाने वाली स्याही की गुणवत्ता पर कोई प्रशासनिक नियंत्रण नहीं है। कुछ स्याहियों में आर्सेनिक और क्रोमियम जैसे अत्यंत विषैले भारी धातु होने की संभावना होती है, जिससे त्वचा की एलर्जी, सूजन और गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए टैटू स्याही की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए, यह मुद्दा डॉ. राऊल ने उठाया।
इसके साथ ही, अगरबत्ती के धुएं से सिरदर्द, आंखों में जलन, गले की बीमारियां और अस्थमा की समस्या बढ़ जाती है। इसलिए अगरबत्ती में इस्तेमाल होने वाले सुगंधित रसायनों पर एफडीए का नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि सिगरेट की तरह ही अगरबत्ती के पैकेट पर भी उसमें इस्तेमाल किए गए रसायनों की जानकारी स्पष्ट रूप से लिखना अनिवार्य किया जाना चाहिए।
वर्तमान में खाद्य विक्रेताओं को एफडीए का ‘FSSAI’ लाइसेंस और बीएमसी के विभिन्न लाइसेंस अलग-अलग लेने पड़ते हैं। इस लालफीताशाही के कारण विक्रेताओं को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस प्रक्रिया को सरल बनाकर ‘सिंगल विंडो’ के तहत एक ही लाइसेंस दिया जाए, जिससे व्यापारियों को राहत मिल सके, इस ओर भी उन्होंने ध्यान आकर्षित किया।
डॉ. शुभा राऊल ने बताया कि इन सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने सकारात्मक रुख दिखाया है और उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

