श्रीनगर / जम्मू:
दक्षिण कश्मीर के हिमालयी क्षेत्र में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा के लिए 57 दिवसीय वार्षिक तीर्थयात्रा पूरे धार्मिक उत्साह और कड़ी सुरक्षा के बीच आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है. जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप और नुवान बेस कैंप (पहलगाम) से श्रद्धालुओं के जत्थे ‘बम बम भोले’ और ‘जय बाबा बर्फानी’ के जयघोष के साथ अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं. प्रशासन के अनुसार, इस वर्ष अब तक करीब 4 लाख श्रद्धालुओं ने अग्रिम पंजीकरण कराया है.
‘प्रोजेक्ट हॉक आई’: अभेद्य सुरक्षा और डिजिटल निगरानी
इस साल अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक का सबसे आधुनिक और बहुस्तरीय सुरक्षा चक्र तैयार किया है:
- 670+ पैरामिलिट्री कंपनियां: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पूरी घाटी और यात्रा मार्गों पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 670 से अधिक अतिरिक्त कंपनियां तैनात की हैं.
- आसमान से नजर (Project Hawk Eye): अनंतनाग पुलिस ने जमीन से लेकर आसमान तक चौबीसों घंटे निगरानी के लिए अत्याधुनिक ड्रोनों के साथ ‘प्रोजेक्ट हॉक आई’ लॉन्च किया है.
- FRS और CCTV नेटवर्क: यात्रा मार्ग और संवेदनशील ठिकानों पर संदिग्धों और राष्ट्रविरोधी तत्वों पर नजर रखने के लिए 34 फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरे और 416 हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी लगाए गए हैं.
- मचान मोर्चे और स्नाइपर्स: पहाड़ी रास्तों पर सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए 28 रणनीतिक मचान मोर्चे बनाए गए हैं और 22 विशेष रूप से प्रशिक्षित स्नाइपर टीमें तैनात की गई हैं.
हाईवे पर ‘मेडिकल मैट्रिक्स’ और आपातकालीन सुविधाएं
कठिन चढ़ाई और ऑक्सीजन की कमी जैसी हाई-अल्टीट्यूड चुनौतियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद है:
- जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 44) पर टिकरी काली माता मंदिर से लेकर चेनानी-नाशरी सुरंग तक एक मजबूत चिकित्सा ढांचा तैयार किया गया है.
- आपातकालीन स्थिति के लिए 10 स्थायी फर्स्ट-एड कैंप और एडवांस लाइफ-सपोर्ट सिस्टम से लैस 6 हाई-टेक एम्बुलेंस रणनीतिक जगहों पर तैनात की गई हैं, ताकि किसी भी बीमार श्रद्धालु को तुरंत राहत दी जा सके.
- विभिन्न लंगर समितियों द्वारा श्रद्धालुओं के रहने-खाने के साथ-साथ 24 घंटे ऑक्सीजन सिलेंडर की बैकअप सुविधा भी दी जा रही है.
रक्षाबंधन पर ‘छड़ी मुबारक’ के साथ होगा समापन
यह पवित्र यात्रा पारंपरिक रूप से बालटाल और पहलगाम दोनों रूटों से सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है. यात्रा का औपचारिक समापन सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन (28 अगस्त) के दिन होगा, जब श्रीनगर के दशनामी अखाड़े से साधु-संतों की अगुवाई में भगवान शिव की पवित्र ‘छड़ी मुबारक’ (पवित्र चांदी की छड़ी) अमरनाथ गुफा पहुंचेगी और अंतिम पूजा संपन्न की जाएगी.
श्राइन बोर्ड की अपील: श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड ने सभी श्रद्धालुओं से अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (CHC) साथ रखने, केवल निर्धारित सुरक्षा काफिले के साथ चलने और नाजुक हिमालयी पर्यावरण को देखते हुए प्लास्टिक का उपयोग न करने का आग्रह किया है.

