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महाराष्ट्र भूमिताजा खबरमेळघाट वन्यजीव शिकार मामला: वन्यजीवों को जहर देने की घटना की होगी गहन जांच — वन मंत्री गणेश नाईक
अंतरराष्ट्रीय तस्करों का नेटवर्क तोड़ने के लिए सरकार मुस्तैद - delete this sentence

मेळघाट वन्यजीव शिकार मामला: वन्यजीवों को जहर देने की घटना की होगी गहन जांच — वन मंत्री गणेश नाईक

अमरावती जिले के सुप्रसिद्ध मेळघाट व्याघ्र परियोजना के अंतर्गत सिपना वन्यजीव विभाग के चौराकुंड वन क्षेत्र में जंगली जानवरों को जहर देकर मारने की दिल दहला देने वाली घटना की उच्च स्तरीय और गहन जांच जारी है। राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक ने विधान परिषद में इस संबंध में लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का उत्तर देते हुए यह महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी क्रूर घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए वन क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता को बड़े पैमाने पर बढ़ाया जा रहा है।

इस संवेदनशील मुद्दे पर सदस्य मिलिंद नार्वेकर द्वारा उठाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर हुई चर्चा में विधायक बच्चू कडू, भाई जगताप, सुनील शिंदे, संजय खोदके और मनीषा कायंदे ने भी हिस्सा लिया।

➤ मुख्य आरोपी गिरफ्तार, कबूले अन्य चार सहयोगियों के नाम
वन मंत्री गणेश नाईक ने घटना का ब्यौरा देते हुए बताया कि मेळघाट के चौराकुंड वन क्षेत्र में बीते २२ और २३ मई २०२६ को जहरखुरानी के कारण पैंगोलिन, भेकर और बंदर जैसे कई बेजुबान वन्यजीवों की मौत का मामला उजागर हुआ था। कुछ जानवरों के शव अत्यधिक सड़ चुके थे, जिससे शुरुआत में जांच में मुश्किलें आईं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वन क्षेत्र निदेशक ने तुरंत घटनास्थल का दौरा कर विस्तृत जांच के आदेश दिए थे। इस मामले में वन विभाग ने एक मुख्य संदिग्ध को गिरफ्तार किया है, जिसने अपना जुर्म कबूल करते हुए इस साजिश में शामिल अन्य चार लोगों के नामों का भी खुलासा किया है। फॉरेंसिक लैब की प्राथमिक रिपोर्ट में जानवरों को जहर दिए जाने की पुष्टि हो चुकी है और विस्तृत अंतिम रिपोर्ट आते ही सभी दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

➤ भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और शिकारियों पर नकेल कसने के लिए वन विभाग निम्नलिखित कड़े कदम उठा रहा है:

  • सघन गश्त और सैटेलाइट मॉनिटरिंग: जिन कोर वन क्षेत्रों में इंसानों के जाने पर सख्त पाबंदी है, वहाँ अवैध गतिविधियों और इंसानी हलचल का पता लगाने के लिए अब सैटेलाइट की मदद से लाइव निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही वन रक्षकों की विशेष गश्ती टीमें २४ घंटे तैनात की गई हैं।

लोकाभिमुख कार्यप्रणाली: स्थानीय नागरिकों और वनवासियों के साथ संवाद बढ़ाकर खुफिया जानकारी जुटाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

गांवों और खेतों की तरफ नहीं आएंगे वन्यजीव, सरकार बनाएगी सफारी प्रोजेक्ट
वन मंत्री ने स्पष्ट किया कि वन्यजीवों को रिहायशी इलाकों की तरफ आने से रोकने के लिए उनके प्राकृतिक आवासों में ही सुधार किया जा रहा है। सरकार पूरे राज्य में नए अभयारण्य, तेंदुआ सफारी और विदर्भ क्षेत्र में विशेष रूप से बाघ परियोजनाओं को और अधिक विकसित करने जा रही है। जंगलों के भीतर ही वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक शिकार और भोजन की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी, जिससे वे भोजन व पानी की तलाश में गांवों या खेतों का रुख न करें और सुरक्षित रहें।

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