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महाराष्ट्र भूमिआध्यात्म / धर्मजगन्नाथ रथ यात्रा 2026: पुरी मंदिर की इन ’22 सीढ़ियों’ पर पैर रखते ही धुल जाते हैं पाप, जानिए इसका गहरा धार्मिक रहस्य
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026: पुरी मंदिर की इन '22 सीढ़ियों' पर पैर रखते ही धुल जाते हैं पाप, जानिए इसका गहरा धार्मिक रहस्य

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026: पुरी मंदिर की इन ’22 सीढ़ियों’ पर पैर रखते ही धुल जाते हैं पाप, जानिए इसका गहरा धार्मिक रहस्य

सनातन धर्म में इन 22 सीढ़ियों का केवल स्थापत्य के लिहाज से ही महत्व नहीं है, बल्कि इनके पीछे कई हैरान कर देने वाले धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक रहस्य छिपे हैं। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों इन सीढ़ियों को इतना पवित्र और चमत्कारी माना जाता है।

क्या है ‘बाईस सीढ़ियों’ का आध्यात्मिक रहस्य?

पौराणिक कथाओं और ओड़िशी संस्कृति के विशेषज्ञों के अनुसार, ये 22 सीढ़ियां मनुष्य के जीवन, उसके दोषों और ब्रह्मांड की शक्तियों का प्रतीक हैं। इन्हें लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं:

  • 22 प्रकार के कषाय (पाप और दोष): शास्त्रों के अनुसार, मनुष्य का मन 22 प्रकार के विकारों (जैसे- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्स्य, ईर्ष्या आदि) से घिरा होता है। माना जाता है कि जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से इन सीढ़ियों पर कदम रखता है, उसके ये सभी विकार दूर हो जाते हैं और उसका मन शुद्ध हो जाता है।
  • पंच ज्ञानेंद्रियां और पंच कर्मेंद्रियां: एक अन्य मान्यता के अनुसार, ये सीढ़ियां मनुष्य की 5 ज्ञानेंद्रियों, 5 कर्मेंद्रियों, 5 प्राण, 5 पंचमहाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश), बुद्धि और अहंकार का प्रतीक हैं। इन सभी पर विजय प्राप्त करने के बाद ही भगवान जगन्नाथ (ब्रह्मांड के स्वामी) के दर्शन का अधिकार मिलता है।
  • वैकुंठ की सीढ़ियां: कई संत इन सीढ़ियों को वैकुंठ धाम की सीढ़ियां भी मानते हैं।

संतान की लंबी उम्र के लिए माएं करती हैं यह अनोखा काम

पुरी मंदिर की इन सीढ़ियों से एक बेहद भावुक परंपरा भी जुड़ी है। ओडिशा और आसपास के राज्यों से आने वाली माताएं अपने छोटे बच्चों को इन सीढ़ियों पर लिटाती हैं और फिर धीरे-धीरे उन्हें सीढ़ियों से नीचे उतारती हैं।

मान्यता: ऐसा करने से भगवान जगन्नाथ और देवी सुभद्रा के आशीर्वाद से बच्चों की अकाल मृत्यु का भय टल जाता है, उन्हें गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिलती है और उनकी आयु लंबी होती है।

🗓️ रथ यात्रा 2026 की तैयारियां तेज

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के अनुसार, इस साल रथ यात्रा को भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए इन सीढ़ियों के आसपास विशेष सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के इंतजाम किए जा रहे हैं। चूंकि रथ यात्रा के दौरान मंदिर के गर्भगृह से भगवान खुद चलकर इन सीढ़ियों से होते हुए रथ तक आते हैं (जिसे ‘पहांडी’ कहा जाता है), इसलिए इन 22 सीढ़ियों का महत्व इस दौरान और ज्यादा बढ़ जाता है।

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