भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्रांति होने जा रही है। महाराष्ट्र का पालघर जिला देश का पहला ‘ऑफशोर’ (समुद्र तटीय) हवाई अड्डा बनाने की महत्वाकांक्षी तैयारी शुरू हो गई है, जिसे पूरी तरह से अरब सागर में कृत्रिम द्वीप बनाकर तैयार किया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार की नोडल एजेंसी ‘महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन’ द्वारा विकसित किए जाने वाले इस महाप्रोजेक्ट के लिए हाल ही में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की मंजूरी दी जा चुकी है। यह हवाई अड्डा मुंबई महानगरीय क्षेत्र के तीसरे बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में उभरेगा, जिसकी वार्षिक क्षमता लगभग 9 करोड़ यात्रियों और 30 लाख मीट्रिक टन माल (Cargo) को संभालने की होगी।
पारंपरिक हवाई अड्डों के विपरीत, यह ऑफशोर एयरपोर्ट पूरी तरह से समुद्र में भराव डालकर तैयार की गई जमीन पर बनेगा, जिसका मॉडल जापान (कंसाई हवाई अड्डा), हाँगकाँग और दक्षिण कोरिया के सफल समुद्र-आधारित हवाई अड्डों से प्रेरित है। इस विशाल परियोजना की अनुमानित लागत 45,000 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें से लगभग 25,000 करोड़ रुपये केवल अरब सागर (कोरे बीच के पास) में बड़े पैमाने पर भूमि सुधार और भराव प्रक्रिया (Land Reclamation) के लिए खर्च किए जाएंगे, जबकि शेष राशि रनवे, आधुनिक टर्मिनल और एयरसाइड-लैंडसाइड बुनियादी ढांचे के निर्माण में लगाई जाएगी। दो समानांतर रनवे वाला यह हवाई अड्डा न केवल यात्री यातायात का दबाव कम करेगा, बल्कि एक प्रमुख वैश्विक एयर कार्गो हब के रूप में भी कार्य करेगा।
रणनीतिक रूप से इस हवाई अड्डे का नियोजन पालघर में ही निर्माणाधीन देश के सबसे बड़े ‘वाढवण बंदरगाह’ (Vadhavan Port) के साथ एकीकृत करके किया जा रहा है, जिससे भारत में एक अद्वितीय ‘सी-टू-स्काई’ (समुद्र से आसमान) लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर स्थापित होगा। इसके अलावा, इस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए ‘उत्तण-विरार सी-लिंक’ का विस्तार सीधे एयरपोर्ट तक करने की योजना है। साथ ही इसे समर्पित मालभाड़ा गलियारे (DFC), मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन स्टेशन, वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्ग से भी जोड़ा जाएगा, जो आने वाले समय में महाराष्ट्र को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और औद्योगिक क्षेत्रों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में गेम-चेंजर साबित होगा।

