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महाराष्ट्र भूमिताजा खबरE20 जनता पार्टी: कॉकरोच आंदोलन के बाद अब ‘इथेनॉल’ का नया राजनीतिक तड़का!
E20 जनता पार्टी: कॉकरोच आंदोलन के बाद अब 'इथेनॉल' का नया राजनीतिक तड़का!

E20 जनता पार्टी: कॉकरोच आंदोलन के बाद अब ‘इथेनॉल’ का नया राजनीतिक तड़का!

मोनिका भोसले
भारतीय राजनीति के विशाल रंगमंच पर रोज नए किरदार, नए दल और नई पार्टियां जन्म लेती हैं, लेकिन हाल के दिनों में जिन नए नामों ने सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक ध्यान खींचा है, वे वाकई अनूठे हैं। अभी दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के अजीबोगरीब नाम वाले आंदोलन का शोर थमा भी नहीं था कि डिजिटल गलियारों में एक और नया झंडा फहरा दिया गया है—‘E20 जनता पार्टी’!

पहली नज़र में ऐसा लगता है कि मानो किसी राजनीतिक दल ने अपनी नई युवा विंग बनाई हो या फिर यह गाड़ियों के किसी नए मॉडल का नाम हो। लेकिन जब इसकी परतें उधेड़ी जाती हैं, तो कड़वा सच सामने आता है। यह ‘E20 जनता पार्टी’ असल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20 Fuel) की नीति के खिलाफ जागे आम वाहन चालकों का एक तीखा डिजिटल आक्रोश है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ और इंस्टाग्राम पर रातों-रात उभरी इस तथाकथित पार्टी के फॉलोअर्स की संख्या हजारों में पहुंच चुकी है। इस मुहिम का सीधा-साधा और तीखा नारा है—”हमारी गाड़ियों को प्रयोगशाला मत बनाओ!”

देश का आम नागरिक, जो दिन-रात पसीना बहाकर, टैक्स चुकाकर अपने लिए एक दोपहिया या कार खरीदता है, वह अब इस बात से परेशान है कि पेट्रोल पंप पर उसकी गाड़ी में क्या डाला जा रहा है। गाड़ियाँ झटके खा रही हैं, माइलेज गिर रहा है, और मैकेनिक का बिल बढ़ रहा है। ऐसे में ‘E20 जनता पार्टी’ ने आम उपभोक्ताओं के उस दर्द को हवा दे दी है जिसे अब तक सरकारी फाइलों और कॉर्पोरेट विज्ञापनों के नीचे दबाया जा रहा था।

भारतीय राजनीति का यह नया ट्रेंड बड़ा दिलचस्प है। पहले NEET और पेपर लीक के मुद्दों पर CJP (‘कॉकरोच जनता पार्टी’) ने अनोखा विरोध प्रदर्शन करके सरकार की नींद हराम की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक की जंग लड़ी। अब उसी तर्ज पर ‘E20 जनता पार्टी’ ने मोर्चा खोल दिया है।

राजनीतिक गलियारों में व्यंग्य यह चल रहा है कि आने वाले दिनों में क्या हमें हर समस्या के नाम पर एक नई ‘जनता पार्टी’ देखने को मिलेगी? कल को महंगाई से परेशान लोग ‘महंगाई जनता पार्टी’ बना लेंगे, तो सड़कों के गड्ढों से तंग आकर लोग ‘गड्ढा जनता पार्टी’ का बैनर टांग देंगे!

परंपरागत राजनीतिक दल जहां जाति, धर्म, और बड़े-बड़े वादों के इर्द-गिर्द चुनाव लड़ते हैं, वहीं ये अचानक उभरे ‘नागरिक आंदोलन’ सीधे उस जगह चोट कर रहे हैं जहां आम आदमी की जेब और उसकी सहूलियत जुड़ी है।

लोकतंत्र का वास्तविक सच यह है कि राजनीति में कोई भी मुद्दा निष्पक्ष नहीं रहता। जब कोई नागरिक आंदोलन सोशल मीडिया पर हजारों लोगों को जोड़ता है, तो सत्ता पक्ष उसे ‘विपक्ष की साजिश’ करार देता है और विपक्ष उसमें अपनी राजनीति चमकाने का मौका तलाशने लगता है। E20 की यह नई मुहिम भी उसी दौर से गुजर रही है।

‘E20 जनता पार्टी’ भले ही कोई पंजीकृत चुनाव आयोग की मान्यता प्राप्त पार्टी न हो, लेकिन यह देश के उस मध्यमवर्ग की आवाज जरूर बन गई है जो रोज पेट्रोल पंप पर पैसे पूरे देता है पर ईंधन को लेकर रो रहा है।

अब देखना यह होगा कि क्या यह ‘इथेनॉल विरोधी’ लहर भी CJP की तरह सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने पर मजबूर कर पाएगी, या फिर यह भी सोशल मीडिया के डिजिटल ट्रेंड्स के समंदर में गुम हो जाएगी। पर इतना तो तय है—भारतीय लोकतंत्र में अब जनता विरोध दर्ज कराने के लिए पारंपरिक राजनेताओं के भरोसे नहीं बैठी है, वह खुद अपनी ‘जनता पार्टी’ खड़ी करना सीख गई है!

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