महाराष्ट्र भूमि | मुंबई:
महाराष्ट्र के अस्पतालों में भर्ती मरीजों से चिकित्सा उपकरणों के नाम पर की जा रही भारी मुनाफाखोरी का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। महाराष्ट्र अन्न व औषधि प्रशासन के तहत काम करने वाली ‘प्राइस मॉनिटरिंग रिसोर्स यूनिट’ द्वारा किए गए एक व्यापक सर्वेक्षण में सामने आया है कि आवश्यक चिकित्सा उपकरणों को उनकी वास्तविक खरीद कीमत से 19 से 29 गुना अधिक दरों पर मरीजों को बेचा जा रहा है।
- सर्वेक्षण से सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े:
IV सेट में 2800% से अधिक मुनाफा: कंपनियों को महज ₹11 की लागत में मिलने वाला ‘IV सेट’ अस्पतालों में मरीजों को ₹325 तक में बेचा जा रहा है।
सिरिंज और मास्क की ओवरप्राइजिंग: लगभग ₹6.75 में तैयार होने वाली स्टैंडर्ड 10ml की सिरिंज बाजार में ₹57.20 तक बेची जा रही है। वहीं, ₹40 से ₹45 की लागत वाला नेबुलाइजर मास्क किट मरीजों को ₹652 से ₹715 में थमाया जा रहा है।
कैथेटर: महज ₹29 की खरीद मूल्य वाला कैथेटर मरीजों को उसकी मूल कीमत से 10 गुना अधिक दाम पर बेचा जा रहा है।
— तुकाराम मुंढे ने केंद्र सरकार को लिखा पत्र:
महाराष्ट्र एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने इस मनमाने मूल्य वृद्धि को पूरी तरह से अतार्किक और गरीब मरीजों का शोषण करार दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार के औषधि विभाग को तत्काल पत्र लिखकर कठोर कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
उन्होंने मांग की है कि दैनिक उपयोग में आने वाली इन सभी सर्जिकल और मेडिकल सामग्रियों को ‘ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013’ के दायरे में लाया जाए, ताकि इनकी अधिकतम खुदरा बिक्री मूल्य (MRP) पर कानूनी सीमा तय की जा सके और अस्पतालों की अनियंत्रित लूट पर अंकुश लगाया जा सके।

