अंतरराष्ट्रीय डेस्क:
वैश्विक स्तर पर तेजी से बदल रहे राजनीतिक और रणनीतिक समीकरणों के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक (Diplomatic) गतिविधियों को तेज कर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 5 जुलाई से 6 देशों के बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक 10 दिवसीय विदेशी दौरे पर रवाना हो गए हैं। 15 जुलाई तक चलने वाले इस महा-दौरे के दौरान भारत कई बड़े रणनीतिक और व्यापारिक समझौते करने जा रहा है, जिसने वैश्विक मंच पर हलचल पैदा कर दी है।
जानिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर के दौरे का पूरा शेड्यूल (Schedule)
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का यह कूटनीतिक दौरा मुख्य रूप से तीन चरणों में विभाजित है, जिसमें वे खाड़ी देशों (Gulf Countries) से लेकर अमेरिका और यूरोप तक का सफर तय करेंगे:
पहला चरण: खाड़ी के 4 देशों का दौरा (5 से 10 जुलाई)
दौरे के पहले पड़ाव में विदेश मंत्री पश्चिम एशिया (West Asia) के चार महत्वपूर्ण खाड़ी देशों का दौरा कर रहे हैं। इस दौरान वे निम्नलिखित देशों के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे:
- कतर (Qatar)
- बहरीन (Bahrain)
- कुवैत (Kuwait)
- ओमान (Oman)
चर्चा के मुख्य मुद्दे: इस क्षेत्र में अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद बदले हालातों, ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security), द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और वहां रह रहे लाखों प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर गहन चर्चा की जा रही है।
दूसरा चरण: न्यूयॉर्क (अमेरिका) में UNSC अभियान की शुरुआत (13 जुलाई)
खाड़ी देशों के बाद विदेश मंत्री सीधे अमेरिका के न्यूयॉर्क पहुंचेंगे। यहाँ 13 जुलाई को वह संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के एक बहुत बड़े मिशन की शुरुआत करने वाले हैं।
- UNSC सदस्यता: भारत साल 2028-29 की अवधि के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में अस्थायी सदस्यता के लिए अपनी आधिकारिक उम्मीदवारी का अभियान लॉन्च करेगा। यह वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते कद को प्रदर्शित करता है।
अंतिम चरण: बेल्जियम में भारत-EU व्यापार और तकनीक परिषद (14-15 जुलाई)
दौरे के आखिरी पड़ाव में 14 और 15 जुलाई को एस. जयशंकर बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स (Brussels) में रहेंगे।
- यहाँ वे तीसरी भारत-यूरोपीय संघ (EU) व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (Trade and Technology Council – TTC) की बैठक में हिस्सा लेंगे। इस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर्स, साइबर सुरक्षा और आधुनिक डिजिटल तकनीकों के आदान-प्रदान पर बातचीत होगी।
इस दौरे का भू-राजनीतिक (Geopolitical) महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा केवल सामान्य राजनयिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत जिस तरह से खाड़ी देशों में अपनी पैठ मजबूत कर रहा है और अमेरिका व यूरोप के साथ मिलकर आधुनिक तकनीक और सुरक्षा पर रणनीतिक कदम उठा रहा है, उसने चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की कूटनीतिक चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। भारत इसके जरिए अपनी दीर्घकालिक विदेश नीति और आर्थिक हितों को सुरक्षित कर रहा है।

