- दस्तावेजों के अभाव में अटके मामलों के लिए सुप्रीम कोर्ट में रखा जाएगा पक्ष; बैठक में वन मंत्री गणेश नाईक भी रहे मौजूद
चंद्रपुर जिले के जिवती तहसील के अंतर्गत आने वाले वन क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संबंधित विभागों को आदेश दिया है कि इन किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए आवश्यक और त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में विधानमंडल के मंत्रिमंडल कक्ष में चंद्रपुर जिले की जिवती तहसील के ‘वन पट्टों’ के संबंध में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक, आदिवासी विकास मंत्री प्रा. अशोक उईके, विधायक देवराव भोंगले, राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास खारगे, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव मिलिंद म्हैसकर और चंद्रपुर की जिलाधिकारी वसुमना पंत सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
➤डिजिटल सात-बारा न मिलने से हो रही परेशानी
बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि जिवती तहसील के कई गांवों का रिकॉर्ड राजस्व विभाग के दस्तावेजों में तो ‘गांव’ के रूप में दर्ज है, लेकिन वन विभाग के रिकॉर्ड में यही जमीनें ‘आरक्षित वन क्षेत्र’ के रूप में दिखाई देती हैं। इस तकनीकी विसंगति के कारण स्थानीय किसानों को डिजिटल सात-बारा और ‘पीएम किसान’ जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस पेच को सुलझाने के लिए निम्नलिखित निर्देश दिए:
➤ दस्तावेजों का संकलन: वर्ष 1980 से पहले की जमीनों के आवश्यक दस्तावेज मिलने पर उन्हें वन क्षेत्र से बाहर करना आसान है। हालांकि, 1980 के बाद की जमीनों के लिए ‘वन संरक्षण अधिनियम’ के तहत अलग मंजूरी की आवश्यकता होती है। पर्याप्त दस्तावेजों के अभाव में कई प्रस्ताव खारिज हो रहे हैं। इसके समाधान के लिए संबंधित गांवों का दोबारा सर्वेक्षण कर आवश्यक सबूत जुटाए जाएं।
➤ सुप्रीम कोर्ट में पैरवी: इन जमीनों को वन क्षेत्र की सूची से बाहर निकालने के लिए राज्य सरकार की ओर से देश की सर्वोच्च अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखने के लिए तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।
➤ऑफलाइन सात-बारा का विकल्प: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन किसानों के डिजिटल सात-बारा तकनीकी कारणों से नहीं निकल पा रहे हैं, उन्हें तत्काल ‘ऑफलाइन सात-बारा’ जारी किया जाए ताकि वे किसान योजनाओं के लाभ से वंचित न रहें।
➤ तेलंगाना सीमा के 15 गांवों का मामला
मुख्यमंत्री फडणवीस ने जिवती तहसील के अंतर्गत आने वाले और तेलंगाना सीमा से सटे 15 गांवों के किसानों की भूमि के अधिकारों को तय करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विभागीय आयुक्तों की समिति द्वारा की गई सिफारिशों के अनुसार, इन गांवों के भूमि अभिलेखों में सुधार कर सात-बारा तैयार करने की प्रक्रिया को अत्यंत तेजी से पूरा किया जाए।
➤ मूलभूत सुविधाओं का विकास
भूमि विवादों के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने जिवती क्षेत्र में घरकुल (आवास) योजना, बस स्टैंड, सिंचाई तालाब, नगर पंचायत क्षेत्र के विकास कार्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का भी तत्काल समाधान निकालने के निर्देश दिए। इसके अलावा, बैठक में जानकारी दी गई कि प्रशासन के काम को सुचारू बनाने के लिए तहसील में ‘कोतवाल’ के नए पदों का सृजन भी किया जा रहा है।
बैठक की शुरुआत में स्थानीय विधायक देवराव भोंगले ने जिवती तहसील के किसानों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए वन भूमि से संबंधित इस विषय पर तत्काल निर्णय लेकर क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत देने का अनुरोध मुख्यमंत्री से किया था।

