- नाबालिग के बलात्कार और हत्या मामले में 65 वर्षीय आरोपी को मौत की सजा
- तीन बच्चों की गवाही ने खोला राज
महाराष्ट्र भूमी । पुणे:
पुणे जिले की एक विशेष अदालत ने भोर तालुका के नासरापुर गांव में साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में 65 वर्षीय भीमराव प्रभाकर कांबले को मौत की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश एसआर सालुंके ने आरोपी कांबले को दोषी पाए जाने के कुछ दिनों बाद यह फैसला सुनाया है।
यह घटना 1 मई, 2026 को नासरापुर में घटी थी। अदालत ने कांबले को भारतीय दंड संहिता और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (पीओसीएसओ) की कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया।
आरोपी पर आईपीसी की धारा 137(2), 65, 65 (बलात्कार), 103 (हत्या), 74 (यश भंग करने के इरादे से बल का प्रयोग) और 140(1) के साथ-साथ पीओसीएसओ अधिनियम की धारा 4, 6, 8 और 12 के तहत यह सजा सुनाई गयी।
बता दे की इस पूरे मामले में तीन मासूम बच्चों की गवाही ने आरोपी को सजा दिलाने में निर्णायक भूमिका बनकर साबित हुई। बच्चों ने न सिर्फ कोर्ट में बहादुरी से आरोपी के खिलाफ सच बयां किया, बल्कि घटना के वक्त आरोपी पर पहला पत्थर भी उन्हीं बच्चों ने बरसाया था, जिसे पुलिस ने बाद में सबसे बड़ा सबूत बनाया।
➤बच्चों की सूझबूझ और बहादुरी
आरोपी के डर से बच्चे वहां से भागे जरूर, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पीड़ित बच्ची पास के एक शेड में ही रह गई थी। बच्चों ने शेड के पिछले हिस्से में जाकर उसकी छत पर जोर-जोर से पत्थर मारना शुरू किया ताकि तेज आवाज हो और कोई मदद के लिए आए। पुलिस ने तफ्तीश के दौरान पंचनामे में इन पत्थरों को जब्त किया था। अदालत में बच्चों द्वारा दी गई गवाही, धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए गए उनके बयानों से हूबहू मेल खाई, जिसने आरोपी के बचने के सारे रास्ते बंद कर दिए।
➤ भट्टी के मजदूर की गवाही से मिला समर्थन
घटनास्थल से महज 20 फीट की दूरी पर स्थित एक भट्टी पर काम करने वाले मजदूर की गवाही ने भी केस को बेहद मजबूत किया। मजदूर ने कोर्ट को बताया कि दोपहर 3 से 3:15 बजे के बीच जब वह खाना खा रहा था, तब उसने बच्चों के चिल्लाने और शेड पर पत्थर गिरने की जोरदार आवाज सुनी थी। इस स्वतंत्र गवाह ने बच्चों के दावों की पूरी तरह पुष्टि कर दी।
➤ 15 दिनों के भीतर 1,200 पन्नों की आरोपपत्र दाखिल
पुणे ग्रामीण पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया। पुलिस अधीक्षक संदीपसिंह गिल की देखरेख में और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विजयमाला पवार के नेतृत्व में गठित इस दल में छह अधिकारी और कर्मी शामिल थे। पुलिस ने घटना के 15 दिनों के भीतर 1,200 पन्नों की आरोपपत्र दाखिल किया । आरोपपत्र में 55 से अधिक गवाहों के बयान, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और तकनीकी साक्ष्य शामिल थे। जांचकर्ताओं ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, चिकित्सा रिपोर्ट, फोरेंसिक विश्लेषण और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी पर आरोप पत्र सिद्ध किया गया।
बता दे की अपने बचाव में आरोपी ने बेहद चौंकाने वाला और अजीबोगरीब तर्क दिया।हालांकि, अदालत ने आरोपी के झूठे और गुमराह करने वाले बयान को सिरे से खारिज कर, मासूम बच्चों की अचूक गवाही और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया।

