- कल्याण-डोंबिवली में कुछ ही देर की बारिश ने खोली नाला सफाई की पोल, कई इलाकों में जलभराव।
- महासभा में शिवसेना (शिंदे गुट) के नगरसेवक कुणाल पाटील ने अधिकारियों को घेरा
- कल्याण ग्रामीण के 27 गांवों के साथ पक्षपात करने और विकास निधि न देने का लगाया आरोप।
महाराष्ट्र भूमि | कल्याण
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका प्रशासन द्वारा मानसून से पहले शत-प्रतिशत नाला सफाई पूरी करने के बड़े-बड़े दावों की हवा मात्र एक घंटे की बारिश ने निकाल दी है। शहर के कई निचले इलाकों में पानी जमा होने से नगर निगम की तैयारियों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। इस मुद्दे को लेकर सोमवार को हुई महासभा बैठक में शिवसेना (शिंदे गुट) के नगरसेवक कुणाल पाटील ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन को आड़े हाथों लिया और अधिकारियों को उग्र आंदोलन की चेतावनी दे डाली।
पिछले तीन दिनों से कल्याण-डोंबिवली और आस-पास के इलाकों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है। इस मामूली बारिश में ही कल्याण पश्चिम के नवनाथ नगर सहित कई रिहायशी इलाकों के घरों में गंदा पानी घुस गया, जिससे स्थानीय नागरिकों को भारी दिक्कतों और नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
इस मुद्दे को महासभा बैठक में उठाते हुए नगरसेवक कुणाल पाटील ने कहा की “अगर जनता के घरों में पानी गया, तो अधिकारियों को बैठने नहीं देंगे”
उन्होंने कहा की “सिर्फ एक घंटे की बारिश में मेरे वार्ड के नागरिकों के घरों में पानी घुस गया। नाला सफाई को लेकर उन्होंने बार-बार महानगरपालिका प्रशासन से लिखित और मौखिक शिकायत की थी। कुछ दिनों पहले ही मनपा शहर अभियंता अनिता परदेशी ने खुद प्रभाग का दौरा किया था, तब उन्होंने उन्हें ग्राउंड जीरो की सभी समस्याएं दिखाई थीं। इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।”
उन्होंने अधिकारियों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आगे भारी बारिश के कारण दोबारा लोगों के घरों में पानी घुसा, तो वे जिम्मेदार अधिकारियों को चैन से उनके दफ्तरों में बैठने नहीं देंगे।
➤ 27 गांवों के साथ अन्याय क्यों?
नगरसेवक पाटील ने कल्याण ग्रामीण के अंतर्गत आने वाले 27 गांवों की अनदेखी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने तीखा सवाल किया कि क्या महानगरपालिका ने इन 27 गांवों के विकास कार्यों के लिए कोई बजट या निधि आवंटित की है या नहीं? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन जानबूझकर इन गांवों के नागरिकों के साथ सौतेला व्यवहार और अन्याय कर रहा है।
महासभा के दौरान प्रशासन की तरफ से इन बुनियादी सवालों का कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर पाटील ने गहरी नाराजगी जताई। दूसरी ओर, पहली ही बारिश में शहर के जलमग्न होने से आम नागरिकों के बीच भी केडीएमसी की कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

