- पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बीएमसी ने नाला सफाई की निगरानी में शामिल की ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ तकनीक।
- नियमों का उल्लंघन करने और बाल श्रम का उपयोग करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश।
महाराष्ट्र भूमि | मुंबई
मुंबई में नाला सफाई के कामों को अधिक पारदर्शक, सटीक और प्रभावी बनाने के लिए इस बार कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया गया है। इस एआई प्रणाली के जरिए काम में कमियाँ और लापरवाही उजागर होने के बाद संबंधित ठेकेदारों से 9 करोड़ 25 लाख रुपये का भारी जुर्माना वसूला गया है। यह महत्वपूर्ण जानकारी उद्योग मंत्री उदय सामंत ने विधान परिषद में दी।
महाराष्ट्र विधान परिषद के नियम 260 के तहत लाए गए प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री सामंत ने नाला सफाई, जलभराव और मानसून की तैयारियों पर सरकार का पक्ष रखा।
➤ जलभराव रोकने के लिए पंपिंग स्टेशनों का जाल
मुंबई के निचले और जलभराव वाले इलाकों (Waterlogging Areas) को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। मंत्री सामंत ने बताया कि शहर में:
6 बड़े पंपिंग स्टेशन और 10 छोटे पंपिंग स्टेशन पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। सखल (निचले) इलाकों में 547 जगहों पर हाई-पावर पंप लगाए गए हैं। उदय सामंत ने कहा कि अत्यधिक भारी बारिश जैसी प्राकृतिक स्थिति में कुछ जगहों पर पानी जमा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक बैकअप सिस्टम और आपदा प्रबंधन टीमें पूरी तरह तैयार हैं।
➤ बाल श्रम पर कड़ा रुख और ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई
मीठागर नाले की सफाई के दौरान बाल मजदूर पाए जाने के मामले पर सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। मंत्री उदय सामंत ने सदन को बताया कि संबंधित ठेकेदार के खिलाफ भारी दंडात्मक कार्रवाई की गई है और उसे ‘ब्लैकलिस्ट’ में डालने की सिफारिश की गई है। साथ ही उसे ‘कारण बताओ नोटिस’ भी जारी किया गया है।
इसके अलावा, मुंबई की महापौर के निरीक्षण दौरे के दौरान एक सुपरवाइजर के मैनहोल में गिरकर घायल होने की घटना पर उन्होंने कहा कि सुरक्षा जाली न होने की वजह से यह हादसा हुआ। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं और बीएमसी को भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न होने देने की सख्त हिदायत दी गई है।
➤ कैसे तय होता है नाला सफाई का शेड्यूल?
मंत्री ने नाला सफाई की पूरी कार्ययोजना को चरणबद्ध तरीके से सामने रखा:
➤80% काम: मानसून की शुरुआत से पहले पूरा किया जाता है।
➤10% काम: मानसून (बारिश) के दौरान लगातार चलता है।
➤ 10% काम: मानसून खत्म होने के बाद किया जाता है।
पेड़ों की छंटाई को लेकर उन्होंने बताया कि इसके लिए दो अलग-अलग प्रणालियां काम कर रही हैं—एक सड़कों के किनारे लगे पेड़ों के लिए और दूसरी हाउसिंग सोसायटियों के अनुरोध पर की जाने वाली छंटाई के लिए। सरकार और महानगरपालिका यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि इस बारिश के मौसम में मुंबईकरों को कम से कम दिक्कतों का सामना करना पड़े।

