- महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की ग्रुप ‘C’ संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा अब कंप्यूटर आधारित मोड में होगी।
- ग्रुप ‘A’, ‘B’ (राजपत्रित) और ‘C’ संवर्ग के उम्मीदवारों को साल में दो या दो से अधिक बार प्रारंभिक परीक्षा देने का मिलेगा मौका।
- महाराष्ट्र सिविल सेवा ग्रुप ‘A’ और ‘B’ मुख्य परीक्षा से साल 2027 से वैकल्पिक विषय किए जाएंगे समाप्त।
महाराष्ट्र भूमि | मुंबई:
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा प्रणाली में किए गए बदलाव वास्तव में कोई फेरबदल नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक कुशल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए किया गया रिफॉर्म है। कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू होने से भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी, नतीजे समय पर घोषित होंगे और छात्रों को साल में दो या दो से अधिक बार प्रारंभिक परीक्षा देने का सुनहरा अवसर मिलेगा। यह महत्वपूर्ण जानकारी राज्य के मंत्री एडवोकेट आशिष शेलार ने विधान परिषद में दी।
महाराष्ट्र विधान परिषद के नियम 260 के तहत लाए गए प्रस्ताव पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए मंत्री शेलार ने एमपीएससी परीक्षा प्रणाली में किए गए ऐतिहासिक सुधारों, उनके पीछे के उद्देश्यों और छात्रों के हित में उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी साझा की।
➤ ऑफलाइन से ऑनलाइन की ओर कदम क्यों?
मंत्री आशिष शेलार ने बताया कि 5 मई 2026 को राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर विभिन्न विभागों के पदों को एमपीएससी के दायरे में स्थानांतरित किया है। उन्होंने इसके पीछे का गणित समझाते हुए कहा:
“पहले जहां हर साल लगभग 6 से 7 हजार पदों के लिए परीक्षाएं आयोजित की जाती थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 50 से 60 हजार पदों तक पहुंचने की उम्मीद है। इस भारी कार्यभार के कारण पारंपरिक ऑफलाइन तरीके से परीक्षा आयोजित करना बेहद कठिन था, इसीलिए सीबीटी प्रणाली को अपनाना आवश्यक हो गया है।”
उन्होंने आगे कहा कि ऑफलाइन परीक्षाओं के लिए स्कूलों और कॉलेजों के परीक्षा केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता था। केंद्रीय भर्ती, बैंकिंग, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य प्राधिकरणों की परीक्षाओं के कारण परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन रही थी। सीबीटी पद्धति से यह समस्या पूरी तरह हल हो जाएगी।
➤ छात्रों का बचेगा कीमती समय और करियर
अब तक छात्रों को साल में केवल एक ही बार परीक्षा देने का मौका मिलता था। यदि कोई उम्मीदवार असफल होता था, तो उसे अगले अवसर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। मगर अब साल में दो या अधिक बार प्रारंभिक परीक्षा आयोजित होने से छात्रों को असफलता के बाद वर्षों तक प्रतीक्षा नहीं करनी होगी, जिससे उनका कीमती समय और करियर सुरक्षित रहेगा।
➤ पारदर्शिता के लिए सी-डैक करेगा ऑडिट
सीबीटी प्रणाली पर उठने वाले संदेहों को खारिज करते हुए मंत्री शेलार ने कहा कि देश में SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड, IBPS, UGC-NET, MH-CET और CAT जैसी प्रमुख परीक्षाएं लाखों उम्मीदवारों के लिए इसी ऑनलाइन पद्धति से सफलतापूर्वक आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, बिहार और हिमाचल प्रदेश के लोक सेवा आयोग भी इसी प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं।
मल्टी-शिफ्ट परीक्षाओं में अंकों के ‘नॉर्मलाइजेशन’को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पद्धति सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वीकृत है और इसी निष्पक्ष मानदंड के आधार पर महाराष्ट्र में भी इसे लागू किया जाएगा। परीक्षा का पूरा नियंत्रण स्वयं एमपीएससी के पास ही रहेगा, जबकि केवल तकनीकी ढांचे के लिए विशेषज्ञ संस्थाओं की मदद ली जाएगी। परीक्षा केंद्रों का कड़ा तकनीकी ऑडिट सी-डैक के माध्यम से कराया जाएगा।
साथ ही, परीक्षा के बाद प्रत्येक उम्मीदवार को उसकी उत्तर पुस्तिका, उत्तर कुंजी और संबंधित डेटा उसके निजी प्रोफाइल पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता और अधिक मजबूत होगी।

