नवी मुंबई: नवी मुंबई महानगरपालिका क्षेत्र में क्लस्टर पुनर्विकास योजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नगर विकास विभाग द्वारा महानगरपालिका के क्लस्टर योजना पर रोक लगाने संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर अधिसूचित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए जाने के बाद राज्य के वनमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता गणेश नाईक ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नवी मुंबई की नियोजित और खुली सोसायटियों में किसी भी परिस्थिति में URS लागू नहीं होने दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात भी उन्होंने कही।
नगर विकास विभाग के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए गणेश नाईक ने कहा कि महानगरपालिका की महासभा ने पूरे शहर का इम्पैक्ट असेसमेंट (प्रभाव मूल्यांकन) कराने का निर्णय लिया है। इस रिपोर्ट के बाद विभिन्न नोड्स में बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति और पुनर्विकास के संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सकेगा।
गणेश नाईक के अनुसार, URS का उद्देश्य घनी आबादी वाले क्षेत्रों, गांवठाणों और झुग्गी-बस्तियों के पुनर्विकास को गति देना है। ऐसे में जिन सोसायटियों में पहले से नियोजित विकास हुआ है और पर्याप्त खुली जगह उपलब्ध है, वहाँ योजना लागू करने से पहले स्थानीय परिस्थितियों, नागरिकों की जरूरतों और बुनियादी सुविधाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत अध्ययन जरूरी है।
“विकास के नाम पर नागरिकों के हितों से समझौता नहीं”
गणेश नाईक ने स्पष्ट किया कि शहर के पुनर्विकास से जुड़े निर्णय केवल प्रशासनिक आदेशों के आधार पर जल्दबाजी में नहीं लिए जाने चाहिए। प्रत्येक क्षेत्र की परिस्थितियों और वहाँ रहने वाले नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर ही आगे की दिशा तय होनी चाहिए।

