➤ फ्लेमिंगो, सुनहरे सियार और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए सात दिनों में मांगी रिपोर्ट
महाराष्ट्र भूमि | नवी मुंबई:
नवी मुंबई के डीपीएस झील परिसर में फ्लेमिंगो के साथ-साथ सुनहरे सियार (गोल्डन जैकल), नेवले और विभिन्न वन्यजीवों की मौजूदगी को देखते हुए इस प्राकृतिक आवास के संरक्षण की मांग तेज हो गई है। डीपीएस लेक के संरक्षण तथा नेरुल सेक्टर ५२-ए को ‘फ्लेमिंगो संरक्षण क्षेत्र’ में शामिल करने के विषय पर वन मंत्री गणेश नाईक की अध्यक्षता में मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में वनमंत्री गणेश नाईक ने अधिकारियों को वन्यजीवों के प्राकृतिक अधिवास को पूरी तरह सुरक्षित रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
इस दौरान इस समीक्षा बैठक में पूर्व नगरसेविका नेत्रा आशीष शिर्के ने डीपीएस झील में फ्लेमिंगो की घटती संख्या और सेक्टर ५२-ए में वन्यजीवों के आवास की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए वन मंत्री गणेश नाईक को ज्ञापन सुपुर्द किया। इस दौरान बैठक में नवी मुंबई मनपा आयुक्त डॉ. कैलाश शिंदे, सिडको अधिकारी रवींद्र मानकर, पर्यावरण समूहों के प्रतिनिधि तथा वन एवं मैंग्रोव विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

➤ समीक्षा बैठक के मुख्य निर्देश और निर्णय
☛ सात दिनों के भीतर रिपोर्ट पेश करने का आदेश: वन मंत्री गणेश नाइक ने बैठक में दिए गए निर्देशों पर तत्काल कार्रवाई करने और सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
☛ सेक्टर ५२-ए को संरक्षण क्षेत्र में करे शामिल : नेरुल सेक्टर ५२-ए क्षेत्र में वन्यजीवों की लगातार बढ़ती उपस्थिति को देखते हुए इसे ‘फ्लेमिंगो कंजर्वेशन जोन’ के तहत लाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया और अंतर-विभागीय समन्वय शुरू करने का निर्णय लिया गया।
☛ संपूर्ण जैव विविधता का संरक्षण: बैठक में स्पष्ट किया गया कि डीपीएस लेक का मुद्दा केवल फ्लेमिंगो तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां पाए जाने वाले सुनहरे सियार, नेवले व अन्य जीवों का संरक्षण भी बेहद आवश्यक है।
☛ प्राकृतिक जलस्रोत व खाद्य श्रृंखला बहाल करें : डीपीएस लेक में ज्वार-भाटे के पानी का सुचारू प्रवाह सुनिश्चित करने और प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला को बनाए रखने के लिए सिडको और संबंधित एजेंसियों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए।


