राजनीति जब केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम न रहकर जन-कल्याण और राष्ट्र-पुनर्निर्माण का संकल्प बन जाती है, तब इतिहास रचा जाता है।
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से लेकर देश के प्रधानसेवक के रूप में वैश्विक पटल पर भारत का मस्तक ऊंचा करने तक, आदरणीय नरेंद्र मोदी जी की 25 वर्षों की यह यात्रा केवल एक राजनेता का सफरनामा नहीं है, बल्कि यह एक आम भारतीय के सपनों, संघर्षों और अटूट जनविश्वास की महागाथा है।
वर्ष 2001 में जब उन्होंने गुजरात की बागडोर संभाली थी, तब राज्य भूकंप के दर्द और प्रशासनिक चुनौतियों से जूझ रहा था। लेकिन एक संगठनकर्ता के रूप में तपे नरेंद्र मोदी ने आपदा को अवसर में बदलते हुए गुजरात को विकास और सुशासन का वैश्विक मॉडल बना दिया। गुजरात के उस ‘सेवक’ ने अपनी प्रशासनिक कुशलता और कड़े फैसलों से यह सिद्ध कर दिया कि अगर नीति स्पष्ट और नीयत साफ हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
2014 में जब देश ने उन्हें ‘प्रधानसेवक’ की जिम्मेदारी सौंपी, तो उन्होंने संसद की सीढ़ियों पर माथा टेककर राजनीति की एक नई परिभाषा लिखी। उन्होंने दिखाया कि लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर किसी दल का नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं का केंद्र है।
राजनीति के गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप होते रहे, लेकिन नरेंद्र मोदी जी का ध्यान सदैव ‘राष्ट्र प्रथम’ के मूलमंत्र पर केंद्रित रहा। केदारनाथ के पुनर्निर्माण से लेकर अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर के निर्माण तक, और लाल किले की प्राचीर से स्वच्छता, बेटी बचाओ या मेक इन इंडिया जैसे अभियानों के आह्वान तक — उन्होंने राजनीति को जन-आंदोलन में बदल दिया।
गरीब कल्याण योजनाएं हों, महिलाओं का सशक्तिकरण हो या सीमाओं पर सेना का बढ़ता मनोबल, 25 वर्षों के इस कार्यकाल में राजनीति का केंद्रबिंदु ‘अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति’ (अंत्योदय) का उत्थान रहा है।
25 वर्षों का यह पड़ाव केवल पीछे मुड़कर उपलब्धियों को गिनने का समय नहीं है, बल्कि यह उस अटूट रिश्ते का उत्सव है जो एक नेता का अपनी मातृभूमि और उसकी जनता के साथ होता है। बिना रुके, बिना थके, निरंतर माँ भारती की सेवा में तत्पर रहने का यह जज़्बा भारत के राजनीतिक इतिहास में दुर्लभ है।
राजनीति में कई चेहरे आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन जो जीवन राष्ट्रसेवा के वेदी पर समर्पित हो जाता है, वह कालजयी बन जाता है। 25 वर्षों की यह गौरवशाली सेवा यात्रा इसी निष्काम कर्मयोग का जीवंत उदाहरण है।

