- UDCPR के नाम पर “नवी मुंबई शहर का सौदा होने नहीं देंगे”- सागर नाईक
- बुनियादी ढांचे पर अध्ययन के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का प्रस्ताव पारित
महाराष्ट्र भूमि | नवी मुंबई:
राष्ट्रीय यूडीसीपीआर (UDCPR) के नियमों की आड़ में नवी मुंबई में अनियंत्रित निर्माण को बढ़ावा न दिया जाए। यह कड़ा प्रहार नवी मुंबई मनपा महासभा बैठक में सभागृह नेता सागर नाईक ने किया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा, “पुनर्विकास निश्चित रूप से होना चाहिए, लेकिन शहर के अस्तित्व को खतरे में डालने वाले किसी भी प्रस्ताव का विरोध किया जाएगा।”
इस दौरान क्लस्टर, अर्बन रिन्यूअल स्कीम, हाउसिंग सोसायटियों के पुनर्विकास और टीडीआर के अतिरिक्त इस्तेमाल से बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति की नियुक्ति का प्रस्ताव बहुमत से पारित किया गया।
➤ बुनियादी ढांचा चरमराने की आशंका
सभागृह नेता सागर नाईक ने स्पष्ट किया कि उन्हें यूआरएस और क्लस्टर पुनर्विकास का विरोध नहीं है। हालांकि, अतिरिक्त छह एफएसआई के कारण शहर के बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाला बोझ चिंताजनक है। उन्होंने उल्लेख किया कि बढ़ती जनसंख्या की तुलना में पानी, सड़क, सीवरेज, यातायात, शिक्षा, स्वास्थ्य और अग्निशमन सुविधाओं की क्षमता की जांच करना आवश्यक है।
उन्होंने भूमिका रखी कि यूआरएस के नाम पर केवल निर्माण क्षमता बढ़ाने के बजाय क्षेत्र के टाउन प्लानिंग में सुधार करना जरूरी है। सड़कों का चौड़ीकरण, खुले स्थान, अग्निशमन वाहनों की पहुंच, यातायात तथा जल एवं सीवरेज व्यवस्था का नियोजन योजना में स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुनर्विकास के माध्यम से नागरिकों को बड़े घर मिलने चाहिए, लेकिन इसके लिए पूरे शहर की बुनियादी ढांचागत क्षमता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
लगभग छह घंटे की चर्चा के बाद प्रस्ताव को मतदान के लिए रखा गया। अंततः बहुमत से प्रस्ताव पारित हो गया। इस प्रस्ताव से यूडीसीपीआर में अर्बन रिन्यूअल स्कीम के प्रावधानों पर नवी मुंबई की जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पुनर्विचार करने के लिए राज्य सरकार के समक्ष बात रखने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। साथ ही, अधिसूचित अर्बन रिन्यूअल प्लान के संबंध में नागरिकों और संबंधित पक्षों से सुझाव व आपत्तियां प्राप्त कर आगे की कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
➤ “क्लस्टर के बिना सुरक्षित पुनर्विकास असंभव”
दूसरी ओर, शिवसेना नगरसेवक ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि, ४० साल पुरानी इमारतें जर्जर अवस्था में हैं और नागरिक डर के साए में रहने को मजबूर हैं। बढ़ती आबादी की समस्याओं और जर्जर इमारतों के समाधान के लिए क्लस्टर योजना ही एकमात्र विकल्प है।
➤ बदलती जरूरतों के अनुरूप होगा अध्ययन: मनपा आयुक्त डॉ. कैलाश शिंदे
नवी मुंबई महानगरपालिका आयुक्त डॉ. कैलाश शिंदे ने सभागृह को बताया कि २०-२५ वर्षों में शहर की आवश्यकताएं बदल चुकी हैं। आईटी-बीपीओ की जमीनों पर अब डेटा सेंटर जैसे आधुनिक प्रोजेक्ट आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिडको की पुरानी इमारतों और समग्र शहर के पुनर्विकास का दीर्घकालिक नियोजन किया जा रहा है, ताकि बढ़ती आबादी को बेहतर नागरिक सुविधाएं दी जा सकें।

