महाराष्ट्र भूमि | मुंबई
महाराष्ट्र सरकार वन विभाग की ओर से आयोजित ‘वन्यजीव सप्ताह 2026’ के उपलक्ष्य में वन्यजीव संरक्षण और अपराध नियंत्रण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाने वाली ‘इंटर-एजेंसी वर्कशॉप’ का सफल आयोजन किया गया। इस वर्ष के वन्यजीव सप्ताह की मुख्य थीम प्राकृतिक आवासों का जुड़ाव, वन्यजीवों की समृद्धि है। इस विशेष कार्यशाला में पुलिस विभाग, वन विभाग और वन्यजीव अपराध नियंत्रण कक्ष के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक मंच पर आकर बेहतर समन्वय और दूरगामी रणनीतियों पर गहन विचार-विमर्श किया।
इस कार्यशाला में वन विभाग के साथ-साथ पुलिस, राजस्व, रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य विभिन्न सरकारी एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। वन्यजीवों की अवैध तस्करी को रोकने, रेलवे ट्रैक या राजमार्गों पर होने वाली पशु दुर्घटनाओं को टालने के लिए ठोस उपाय करने, आपात स्थिति में तुरंत संयुक्त सहायता पहुंचाने, वन्यजीव अपराधों की जांच में तेजी लाने और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल व सूचना साझा करने के तंत्र को और मजबूत करने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई और नीतिगत निर्णय लिए गए।
इस दौरान वनमंत्री गणेश नाईक ने कहा कि हमारी समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव महाराष्ट्र की अमूल्य प्राकृतिक संपदा हैं। इसका संरक्षण करने के लिए सभी एजेंसियों द्वारा सामूहिक रूप से की गई यह पहल अत्यंत सराहनीय है। इस कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी संस्थाओं के प्रतिनिधियों और वन अधिकारियों का मैं सहृदय अभिनंदन करता हूँ।
संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान और महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में मुख्य रूप से महाराष्ट्र राज्य के पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते और वन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय खंदारे उपस्थित रहे। इसके साथ ही प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एम. एस. रेड्डी, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पश्चिम) रविकिरण गोवेकर, मुख्य वन संरक्षक (मंत्रालय) जितेंद्र रामगांवकर, मुख्य वन संरक्षक (कांदळवन) एन. आर. प्रवीण, संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान की निदेशक अनिता पाटिल और वन्यजीव अपराध नियंत्रण कक्ष के उप-निदेशक योगेश वेडकर सहित कई उच्च अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस कार्यशाला में वन विभाग, पुलिस प्रशासन और वन्यजीव अपराध नियंत्रण कक्ष के अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

